Why silence against violence ?

Muslims in many parts of India are marking Eid today with black band. To register their anguish and protest over the unabated assaults on Muslims which have also resulted in killings. Muslims are being attacked on the excuse of stealing of cattle, committing a crime or carrying beef or raising slogans for Pakistan or bursting crackers to celebrate their victory over India in a cricket match, or for simply looking Muslim. Continue reading

‘In Search of Gandhiji’s India’

Published on Jan 31, 2017

on 29 january 2017, JP Foundation & Students Front for Swaraj organised a lecture session on the topic ‘In Search of Gandhiji’s India’ on the eve of Death Anniversary of Gandhi. Prof. Anand Kumar, Prof. Apporvanand, Mr. Kumar Prashant were among the speakers. Pramod Kumar Yadav presided the session.

ईदगाह की सुंदरता से मुग्ध प्रेमचंद और हम (On Eid)

रमजान के पूरे तीस रोजों के बाद ईद आयी है। कितना मनोहरकितना सुहावना प्रभात है। वृक्षों पर अजीब हरियाली हैखेतों में कुछ अजीब रौनक हैआसमान पर कुछ अजीब लालिमा है। आज का सूर्य देखोकितना प्याराकितना शीतल हैयानी संसार को ईद की बधाई दे रहा है। गॉंव में कितनी हलचल है। ईदगाह जाने की तैयारियॉँ हो रही हैं। किसी के कुरते में बटन नहीं हैपड़ोस के घर में सुई-धागा लेने दौड़ा जा रहा है। किसी के जूते कड़े हो गए हैंउनमें तेल डालने के लिए तेली के घर पर भागा जाता है। जल्दी-जल्दी बैलों को सानी-पानी दे दें। ईदगाह से लौटते-लौटते दोपहर हो जाएगी। तीन कोस का पैदल रास्ताफिर सैकड़ों आदमियों से मिलना-भेंटनादोपहर के पहले लौटना असम्भव है।

जब भी ईद करीब आती है मुझे ईदगाह की याद आने लगती है. मुझे ईद की आमद की खुशी का, बल्कि सही लफ्ज़ उल्लास ही होगा, इससे बेहतर इजहार कहीं और नहीं मिलता. प्रेमचंद को, जो अपने ही शब्दों में एक कायस्थ बच्चा ठहरे, ईद के चलते कुदरत भी बदली-बदली नज़र आती है. Continue reading

क्या राजनीति सिर्फ जोड़-तोड़ का खेल भर है? (Is politics only about strategies?)

राजनीति क्या सिर्फ रणनीति का खेल है?क्या उससे आदर्श की संभावना पूरी तरह समाप्त हो गई है?क्या अब हम किसी राजनेता या दल की प्रशंसा सिर्फ इसलिए करने को बाध्य हैं कि उसने कुशल या चतुर रणनीति के जरिए अपने विरोधियों को हक्का बक्का छोड़ दिया है?ये प्रश्न भारत के लिए,खासकर,उसकी राजनीति के सन्दर्भ में प्रासंगिक हो उठे हैं. राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव में अलग-अलग राजनीतिक दलों की भूमिका ने  हमें इन पर नए सिरे से इन सवालों पर सोचने को मजबूर किया है. Continue reading