Foisting the flag

 The governments of Uttar Pradesh and Madhya Pradesh have belittled the Troclour and  Independence Day by directing   Madarsas to hoist the national flag and take out Tiranga rallies on 15 August. They have also been asked by the government of the Uttar Pradesh to videotape it and submit it as proof. It should at least embarrass if not shame all right thinking Indians. But this is an impossible expectation from a people who are  high on nationalism.  Continue reading

गाँधी और भारत छोड़ो आंदोलन (Gandhi and Quit India movement)

हेगेल ने लिखा कि प्रत्येक महान घटना या विभूति इतिहास में दो बार अवतरित होती है.कार्ल मार्क्स ने इस इस पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि हेगेल यह जोड़ना भूल गए कि पहली बार वह त्रासदी होती है और दूसरी बार प्रहसन.लेकिन अक्सर यह होता है कि देश, समाज महानता को किसी भी रूप में दुहराने में खुद को अक्षम पाटा है.तब वह पहले की पैरोडी करके ही खुश हो लेता है.नंगे बदन, गोल फ्रेम का चश्मा लगाकर गाँधी का भेस धरने की परंपरा तो इस देश में है ही जो कतई फूहड़ लगती है,उन्होंने जो महान आन्दोलन शुरू किए और जिनका नेतृत्व किया,उनकी भी पैरोडी की जाती है.मसलन,दांडी अभियान की नकल पर उसी रास्ते पर उतनी ही दूरी गाँधी का स्वांग धरे किसी कृशकाय व्यक्ति के साथ चलती हुई भीड़!या चम्पारण सत्याग्रह की शताब्दी के मौके पर वापस चम्पारण जाना.जबकि चम्पारण की आत्मा वहाँ से बहुत दूर  मध्य प्रदेश में मेधा पाटकर के आंदोलन में फिर से खुद को व्यक्त करती दिखलाई पड़ती है.मेधा के साथ  जो बर्ताव सरकार ने किया,उससे कहीं सभ्य ब्रिटिश सरकार का व्यवहार गाँधी के साथ था.और हम आज की निचली या पहली अदालतों से भी उस न्याय की उम्मीद नहीं कर सकते जो मोतिहारी की 1917 की अदालत ने गाँधी की गिरफ्तारी के बाद उन्हें बिना जमानत लिए छोड़ते हुए किया था. Continue reading

Jharkhand Govt Misusing Gandhi, Public Funds to Fuel Anti-Christian Hate

The quotation published in a newspaper ad is misleading and mischievous. It is erroneous and puts words in Gandhi’s mouth that are not his.

Mahatma Gandhi has a new job. Three years after he was appointed as the brand ambassador of the Swatchta Abhiyan of the government of India, he has now been deployed as the chief spokesman and mascot of the Jharkhand government anti-conversion drive. Continue reading

1942 का किस्सा (1942 Quit India Movement)

नौ अगस्त आने ही वाला है. इसे अगस्त क्रान्ति के आरम्भ के दिन के तौर पर जाना जाता है. अगस्त, 1942 के पहले हफ्ते में तब की बंबई में हुई कांग्रेस की कार्य समिति की बैठक ने वह प्रस्ताव पारित किया जिसे ‘भारत छोड़ो’ प्रस्ताव के नाम से जाना गया. इस प्रस्ताव तक पहुँचना और उस पर कांग्रेस में एकमत कायम करना आसान न था जैसा आम तौर पर आज समझा जाता है. इसके पीछे एक लंबी तैयारी और आपसी विचार विमर्श और बहस मुबाहसा का दौर था. Continue reading