अगस्त के ढलते पखवाड़े में धृतराष्ट्र आलिंगन की याद

युद्ध समाप्त हो चुका है. मात्र अठारह दिनों का युद्ध. लेकिन कहा जाता है महाभारत. क्योंकि यह रणक्षेत्र में कौरवों और पांडवों की सेनाओं के आमने सामने मुकाबले के बहुत पहले से शुरू हो गया था. पांडवों ने बारह बरस का वनवास तो गुजारा ही था, एक वर्ष का अज्ञातवास भी उन्हें साथ में झेलना पड़ा था. फिर भी दुर्योधन ने सुई की नोंक भर ज़मीन देने से इनकार कर दिया. पांडव तो सिर्फ पांच गाँव भर भूमि ही चाहते थे. कृष्ण ने मध्यस्थता का प्रयास किया, लेकिन सत्ता और अपनी शक्ति के मद से चूर दुर्योधन ने कृष्ण को नहीं सुना. वे खाली हाथ लौट आए.
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