धर्मनिरपेक्ष राजनीति को अपने आलस से निकलने की ज़रूरत है

 

Published on 23 Jun 2017

आईडिया ऑफ़ इंडिया कॉन्क्लेव के आयोजन में बढ़ती सांप्रदायिकता और नफ़रत के विषय में अपने विचार साझा करते हुए I इस वक्त जो दल सत्ता पर काबिज़ है वह इस मुल्क में निरंतर अस्थिरता और बेचैनी चाहता है और आज देश में हिन्दू धर्म का राष्ट्रीयकरण करने की कोशिश की जा रही है I इसमें धर्म और राष्ट्रवाद दोनों को इस कदर मिला दिया गया है कि आम हिन्दू महसूस करने लगा है कि उसे इस राष्ट्रवाद की रक्षा करनी है I

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