‘In Search of Gandhiji’s India’

Published on Jan 31, 2017

on 29 january 2017, JP Foundation & Students Front for Swaraj organised a lecture session on the topic ‘In Search of Gandhiji’s India’ on the eve of Death Anniversary of Gandhi. Prof. Anand Kumar, Prof. Apporvanand, Mr. Kumar Prashant were among the speakers. Pramod Kumar Yadav presided the session.

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ईदगाह की सुंदरता से मुग्ध प्रेमचंद और हम (On Eid)

रमजान के पूरे तीस रोजों के बाद ईद आयी है। कितना मनोहरकितना सुहावना प्रभात है। वृक्षों पर अजीब हरियाली हैखेतों में कुछ अजीब रौनक हैआसमान पर कुछ अजीब लालिमा है। आज का सूर्य देखोकितना प्याराकितना शीतल हैयानी संसार को ईद की बधाई दे रहा है। गॉंव में कितनी हलचल है। ईदगाह जाने की तैयारियॉँ हो रही हैं। किसी के कुरते में बटन नहीं हैपड़ोस के घर में सुई-धागा लेने दौड़ा जा रहा है। किसी के जूते कड़े हो गए हैंउनमें तेल डालने के लिए तेली के घर पर भागा जाता है। जल्दी-जल्दी बैलों को सानी-पानी दे दें। ईदगाह से लौटते-लौटते दोपहर हो जाएगी। तीन कोस का पैदल रास्ताफिर सैकड़ों आदमियों से मिलना-भेंटनादोपहर के पहले लौटना असम्भव है।

जब भी ईद करीब आती है मुझे ईदगाह की याद आने लगती है. मुझे ईद की आमद की खुशी का, बल्कि सही लफ्ज़ उल्लास ही होगा, इससे बेहतर इजहार कहीं और नहीं मिलता. प्रेमचंद को, जो अपने ही शब्दों में एक कायस्थ बच्चा ठहरे, ईद के चलते कुदरत भी बदली-बदली नज़र आती है. Continue reading