राजनीति नहीं विकास

नरेंद्र मोदी को अमेरिका द्वारा वीज़ा न दिए जाने को लेकर राज्यसभा में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुजरात जनसंहार में नरेंद्र मोदी की हिस्सेदारी को आरोप मात्र की जो संज्ञा दी, उससे कुछ दूसरे प्रश्न उठ खड़े हुए हैं. मनमोहन सिंह की प्रशंसा अख़बारों और दूसरे माध्यमों में अहर्निश की जाती है- उन्हें पढ़ा-लिखा, सभ्य-सुसंस्कृत प्रधानमंत्री माना जाता है. उनकी छवि एक ऐसे व्यक्ति के रूप में गढ़ने की कोशिश की जा रही है जो निर्मल प्रशासन देने का प्रयास कर रहा है और विचारधारात्मक राजनीतिक दलदल से ऊपर रहना चाहता है. दूसरे ऐसा भले ही माने, मनमोहन सिंह के लिए संभवत: यह विडंबना नहीं है कि नरेंद्र मोदी की स्वाभिमान रैली में उनकी प्रशंसा की गई और मोदी के पक्ष में बयान देने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया गया.


राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने सांसदों को कहा कि आज हमें राजनीतिक राजनीति की नहीं, विकासात्मक राजनीति की जरूरत है. भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व की सरकार के पाँच सालों में विचार-विमर्श का चरम बिंदु वह था जिस पर संपूर्ण मध्यवर्ग इस बात पर सहमत था कि राजनीति की जगह विकास को तरजीह दी जानी चाहिए. राष्ट्रपति अब्दुल कलाम की ‘ विजन-2020’ कि लोकप्रियता, सहृदय विद्वान् के रूप में छवि का प्रचार अटल बिहारी के एक श्रीदे कवि के बिंब को सार्वजनिक चेतना पर आरोपित करने का अभियान और उसके बाद मनमोहन सिंह की एक निष्कलंक, सुशिक्षित तस्वीर. अगर आज इसे ध्यान में रखें तो समझने में आसानी होती है कि अपने लिए अधिक से अधिक सुविधाएं बटोरने को आतुर समुदायों के लिए अटल बिहारी वाजपयी  और मनमोहन सिंह में कोई बुनियादी फर्क क्यों नहीं है. ध्यान जाता है कि लोकसभा के 2004 के चुनाव नतीजे के बाद सोनिया गांधी के प्रधानमंत्री बनने की आशंका से इसी वर्ग में क्यों हाहाकार मच गया था.
राजनीति की जगह विकास का सिद्धांत भारतीय जनता पार्टी के दिमाग की उपज था. जनता को अपने जीवन का विचार सुनने की कोई जरूरत नहीं, उसे इस बात की फिक्र होनी चाहिए कि उसे पीने को साफ पानी मिल रहा है  चलने को चिकनी सड़कें मिल रही हैं और 2 जून पौष्टिक आहार मिल रहा है. दिक्कत सिर्फ यह है कि भारतीय जनता पार्टी के विकास को सर्वोपरि जीवन मूल्य मानने की दलील को भारत की जनता ने पिछले लोकसभा चुनाव में ठुकरा दिया.
लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की पराजय की तार्किक परिणति सोनिया गांधी के प्रधानमंत्री बनने में थी. सिर्फ  इसलिए नहीं कि कांग्रेसी नेहरु गांधी परिवार के आगे देख नहीं पाते, इसलिए भी कि किसी कांग्रेसी नेता ने संप्रदायवाद विरोधी विचार का प्रचार उस सक्रियता से नहीं किया था, जो सोनिया गांधी में दिखाई पड़ा था. प्रधानमंत्री चुने जाने के समय अगर आप सुशिक्षित वर्ग  के प्रचार-तंत्र पर गौर करें तो एक तरफ जो सोनिया गांधी के खिलाफ खोजकर लाया गया था, वह यह कि वह पर्याप्त शिक्षित नहीं है. जब सोनिया गांधी ने मनमोहन सिंह का नाम प्रस्तावित किया तो इससे संस्कृत समुदाय ने राहत की सांस ली- एक ऐसा व्यक्ति चुन लिया गया था जो विकास का पर्याय है, जिसके दामन पर न तो संप्रदायवादी राजनीति का कलंक है, न संप्रदायवाद  विरोधी कीचड़ का छींटा है.

विकास और समृद्धि के लिए विचार निरपेक्षता क्या आवश्यक शर्त है? मनमोहन सिंह ने सत्ता संभालने के कुछ दिन बाद जब वामपंथी अतिवादिता और दक्षिणपंथी अतिवादिता से अपनी समान दूरी की घोषणा करने की जरूरत महसूस की तो क्या वे विचार निरपेक्ष शुचिता का महत्व बतला रहे थे. अगर ऐसा होता तो न हिटलर की विचारधारा पराजित हुई होती, न उनका पतन हुआ होता शायद सारे उपनिवेशों को भी स्वतंत्रता की आवश्यकता न होती. दरअसल, लोकतंत्र वह विचार या मूल्य  है जिसके लिए व्यक्ति भी और पूरे के पूरे समाज भी अपनी सारी सुख-सुविधा छोड़कर जान की बाजी लगाने तक को तैयार हो जाते हैं.
अंग्रेजी शासन से मुक्ति के बाद भारत में सुचिंतित निर्णय लिया कि वह धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य रहेगा. लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी निश्चित करने का अर्थ है उसे चुनाव की पूरी आजादी होगी. महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू ने भारतीय धर्मनिरपेक्षता को इस तरह परिभाषित किया कि भारतीय राज्य किसी धार्मिक विश्वास का अनादर नहीं करेगा, लेकिन वह किसी धर्म विशेष से जुड़ी मान्यता, व्यवहार, पद्धति को प्राथमिकता भी नहीं देगा. नेहरू ने तो यह भी कहा कि सामाजिक न्याय और समानता के धर्मनिरपेक्षता का कोई भी ख्याल खोखला करेगा. गांधी और नेहरू ने उनके वक्त में दुनिया में राज्य की प्रचलित प्रणालियों  में से किसी को अगर भारत के लिए आदर्श नहीं माना तो इसके पीछे भी विचारों की स्वतंत्रता का सिद्धांत काम कर रहा था. उन्होंने भारत के लिए तीसरा रास्ता खोजने की कोशिश की.

भारतीय स्वाधीनता आंदोलन से स्वतंत्र लोकतांत्रिक भारत को अपने लिए कोई संदेश धारण करना है तो वही है कि लोकतंत्र पर आधारित विकास का अर्थ विचारशून्य, अर्थहीन  सामंजस्य बनाना नहीं है. उसमें सामाजिक, सांस्कृतिक असमानता के कारणों की पहचान करना और उनके विरुद्ध सक्रियता पूर्वक काम करना तो है ही, अत्यधिक आत्म-केंद्रितकता  के कारण बढ़ते सामाजिक ठंडेपन के खिलाफ युद्ध करना है. सुशिक्षित और सुसंस्कृत व्यक्ति वह नहीं है जो अजातशत्रु हो. शिक्षा का सर्वोत्तम मूल्य संवेदनशीलता है और आत्म विस्तार की क्षमता प्राप्त करना है. यह तब तक मुमकिन नहीं जब तक हम आत्म समीक्षा करने की क्षमता विकसित न करें, जब तक हम खुद अपने बारे में विचार करने की शक्ति न रखें.

चुनाव करने की स्वतंत्रता का अर्थ चुनाव करने की बाध्यता भी है. जो यह कहे कि मैं तो इससे ऊपर हूँ वह दरअसल, किसी भी प्रकार की नैतिक जवाबदेही से मुक्ति चाहता है, उसमें नैतिक साहस की कमी है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जब यह कहते हैं कि  गुजरात जनसंहार में नरेंद्र मोदी की भूमिका के बारे में महज़ आरोपों के आधार पर राय नहीं बनाई जा सकती तो वे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निष्कर्षों से खुद को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं. वह पचास  से भी ज्यादा उन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों और एजेंसियों के निष्कर्षों से निरपेक्षता प्रदर्शित कर रहे हैं जिन्होंने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की तरह ही नरेंद्र मोदी की सरकार को गुजरात नरसंहार के लिए सीधे तौर पर जवाबदेह ठहराया था. मनमोहन सिंह का तर्क यह है कि न्यायिक प्रणाली से नरेंद्र मोदी पर आरोप पुष्ट नहीं  हुए हैं. एक शिक्षाविद् ने ठीक ही कहा कि अगर नरेंद्र मोदी को न्यायिक प्रणाली अब तक जवाबदेह नहीं ठहरा सकी है, इससे उसकी न्यूनता सिद्ध होती है, मोदी आरोपमुक्त नहीं होते.
संप्रदायवाद विरोधी जनादेश के बल पर प्रधानमंत्री बने मनमोहन सिंह का कर्तव्य था कि वह शासन प्रणाली और न्याय प्रणाली की न्यूनता के विरुद्ध ठोस कदम उठाएं, दस महीने के आचरण में संप्रदायवाद विरोधी विचार के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रमाण तो नहीं दिया है, यह जरूर प्रदर्शित किया है कि वह एक विचारहीन  स्वच्छ प्रशासक के रूप में याद किए जाने को उत्सुक हैं. विचारहीनता और तटस्थता लोकतंत्र की मृत्यु की घोषणा है – सुशिक्षित प्रधानमंत्री शायद इसे बड़ी कीमत चुका कर पहचानेंगे- तब तक शायद कांग्रेस के लिए और भारत के लिए भी देर हो चुकी होगी.

  • जनसत्ता, अप्रैल,  2005
Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s